टिहरी में हथकरघा, हस्तशिल्प और लघु उद्योग पुरस्कारों के लिए उद्यमियों का चयन
टिहरी गढ़वाल। जनपद में पारंपरिक हस्तकला, स्थानीय उत्पादों और लघु उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए जिला स्तरीय पुरस्कारों हेतु उत्कृष्ट उद्यमियों एवं शिल्पकारों का चयन किया गया। टिहरी गढ़वाल मुख्यालय स्थित विकास भवन सभागार में मुख्य विकास अधिकारी वरुणा अग्रवाल की अध्यक्षता में चयन प्रक्रिया आयोजित हुई। इसमें हथकरघा, हस्तशिल्प और लघु उद्योग की विभिन्न श्रेणियों में प्रथम एवं द्वितीय पुरस्कार के लिए प्रतिभागियों का चयन किया गया।
हथकरघा श्रेणी में रंजनी देवी और नत्थी लाल चयनित
हथकरघा श्रेणी में ढालवाला की रंजनी देवी को बिच्छू घास से निर्मित मफलर के लिए प्रथम पुरस्कार हेतु चयनित किया गया। वहीं, चंबा के नत्थी लाल को शॉल निर्माण के उत्कृष्ट कार्य के लिए द्वितीय पुरस्कार के लिए चुना गया। पारंपरिक सामग्री से तैयार उत्पाद स्थानीय हस्तकला और कारीगरों के कौशल को पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
हस्तशिल्प श्रेणी में दिनेश लाल को प्रथम पुरस्कार
हस्तशिल्प श्रेणी में ग्राम खंडोगी के दिनेश लाल को पहाड़ी तिबार और सुरकंडा मंदिर की कलाकृति के लिए प्रथम पुरस्कार हेतु चयनित किया गया। वहीं, नरेंद्रनगर की उषा देवी को क्रोशिया से निर्मित बेबी स्वेटर और फ्लावर पॉट के लिए द्वितीय पुरस्कार के लिए चुना गया। इन उत्पादों के माध्यम से स्थानीय शिल्पकारों की रचनात्मकता और हस्तनिर्मित वस्तुओं की विविधता सामने आई है।
लघु उद्योग श्रेणी में इन उद्यमों का चयन
लघु उद्योग श्रेणी में मैसर्स सुरईया वेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड, घनसाली को प्रथम पुरस्कार तथा मैसर्स हिमालय सुपरफार्मर्स इनोवेंचर्स को द्वितीय पुरस्कार हेतु चयनित किया गया। इस श्रेणी में चयन का उद्देश्य स्थानीय स्तर पर उद्योगों के विकास, उद्यमिता और स्वरोजगार को प्रोत्साहित करना है।
स्थानीय कारीगरों और उद्यमियों को मिलेगा प्रोत्साहन
जिला स्तरीय पुरस्कारों का उद्देश्य जनपद में पारंपरिक हस्तकला, हथकरघा उत्पादों, स्थानीय संसाधनों पर आधारित उद्यमों और लघु उद्योगों को प्रोत्साहित करना है। इसके साथ ही उत्कृष्ट कार्य करने वाले कारीगरों और उद्यमियों को पहचान दिलाकर स्वरोजगार के अवसरों को बढ़ावा देना भी इसका प्रमुख उद्देश्य है। इस प्रकार की पहल से स्थानीय उत्पादों और पारंपरिक शिल्प को प्रोत्साहन मिलने के साथ जनपद में उद्यमिता के विकास को भी बढ़ावा मिल सकता है।